Sunday, November 22, 2009
कब बंद होगा सचिन का अपमान........!
सचिन एक ऐसा नाम जिसे किसी भी पहचान की आवश्कता नहीं हैं ........ सचिन विवादों से दूर रहने वाला एक खिलाड़ी हैं लेकिन आज उसे उसी के देश में बदनाम किया जा रहा हैं। उस के एक बयान पर कि वह पहले भारतीय हैं फिर महाराष्टï्रीय । इस बयान पर बाल ठाकरे ने अपने समाचार प ा में सचिन पर निशाना साधा और उ हें नसीहत दे डाली। शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे ने सचिन की तुलान सुनीज गावस्कर से करते हुए कहा कि वे स"ो महाराष्टिï्रयन हैं ऐसे बयान से बाल ठाकरे फिर जनता के दिल में अपनी जगह बनाने की सोच रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं होगा। किसी की बुराई करने से ,किसी के दिल में जगह नहीं बनाती हैं।ऐसे मेें जहां सरकार सचिन का स मान कर रहीं हैं वही दूसरी ओर शिवसेना उनका अपमान कर रहीं हैं। सरकार को इस के लिए उचित कदम उठान पड़ेगा। योंकि किसी भी स िमानित व्यक्ति के खिलाफ कुछ बोलने से पहले हर वर्ग सोचे। जैसे राज ठाकरे ने हि दी भाषियो का विरोध किया और संविधान का विरोध किया। जिससे राज ठाकरे और बाल ठाकरे की कभी अलोचान हुई हैं। इनकी अलोचना न केवल राजनीति बल्कि सभी वर्ग के लोगों ने की है। सचिन तेंदुलकर पर हमला जारी रखते हुए शिवसेना ने रविवार को उनकी तुलना सुनील गावस्कर से करते हुए कहा कि गावस्कर सच्चे महाराष्टिï्रयन हैं। इसके पहले पार्टी सुप्रीमो बाल ठाकरे ने 36 वर्षीय क्रिकेटर की उनकी मुंबई फॉर ऑल टि प ाी के लिए आलोचना की थी। सचिन पर ताजा हमला पार्टी के मुखप ा सामना में एक आलेख में सांसद संजय राउत ने किया है। तेंदुलकर की गावस्कर के साथ तुलना करते हुए राउत ने आरोप लगाया कि ऐसा कोई उदाहर ा नहीं है जब सचिन ने अ य मराठी क्रिकेटरों की ओर मदद का हाथ बढ़ाया हो। अ य की बात तो दूर उ होंने विनोद कांबली का भी समर्थन नहीं किया। बतौर क्रिकेटर तेंदुलकर की महानता स्वीकार करते हुए राउत ने कहा कि दूसरी ओर गावस्कर जब भारतीय टीम के कप्तान थे, आधी टीम मुंबई और महाराष्टï्र से थी। उ होंने कई मराठी खिलाडियों को टेस्ट कैप का दर्जा दिलाया। आलेख में दावा किया गया है कि इस संदर्भ में गावस्कर सच्चे महाराष्टिï्रयन हैं और पूरा देश उ हें अब भी यार करता है। इसमें कहा गया है कि सचिन जैसे खिलाड़ी क्रिकेट के खेल के कार ा अमीर हुए हैं। सचिन की संप िा 200 करोड़ रुपये से अधिक की है। हम उ मीद करते हैं कि सचिन को महाराष्टï्र का होने पर वैसा ही गर्व होना चाहिए जैसा सौरव गांगुली को बंगाल से है। राउत ने कहा कि राहुल द्रविड़ भी मराठी खिलाड़ी हैं लेकिन उनकी निष्ठा कर्नाटक के साथ है। इसके पहले 16 नवंबर को बाल ठाकरे ने सचिन के खिलाफ टि प ाी की थी जिसकी बीसीसीआई के अलावा कई राजनेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। ठाकरे ने कहा था कि तेंदुलकर ने अपनी टि प ाी के जरिए क्रीज छोड़ दी है और राजनीति की पिच पर आ गए हैं। और इससे मराठी भावना को ठेस लगी है। उसके पहले तेंदुलकर ने कहा था कि मैं महाराष्टिï्रयन हूं और मुझे इसका काफी गर्व है। लेकिन मैं पहले भारतीय हूं। और मुंबई सभी भारतीयों का है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने लिखा है कि सचिन क्रिकेटर के तौर पर बड़े हैं लेकिन वो महाराष्ट्र से बड़े नहीं हैं। सचिन के चौकों और छक्कों की वजह से महाराष्ट्र को मुंबई नहीं मिली। संजय राउत ने यहां तक लिखा है कि सचिन के खेल का मराठी अस्मिता से कुछ भी लेना-देना नहीं है। सचिन सिर्फ इसलिए प्रसिद्ध हैं योंकि वो क्रिकेटर हैं। वो कोई यागमूर्ति नहीं है और इस बात पर कोई यान नहीं देता। आगे लेख में कहा गया है कि सचिन ने 17 हजार रन बनाए इसलिए वो महान खिलाड़ी हो गए लेकिन शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे ने भी 8 करोड़ जनता को लडऩे की ताकत दी। कम से कम 17 लाख लोगों को रोजगार दिया होगा। रन बनाना और पेट की आग बुझाने में फर्क है। यानी साफ है कि एक बार फिर सचिन का नाम लेकर शिवसेना अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में है।
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